जयपुर ( रमेश रामावत ) राजस्थान पुलिस के सात पुलिस निरीक्षकों (Seven Police Inspectors) को जल्द ही घर भेज दिया जाएगा। सरकार से इन पुलिस निरीक्षकों को हटाने (Compulsory Retirement ) की अनुमति मिल गई है। पुलिस मुख्यालय सात पुलिस निरीक्षकों की अनिवार्य सेवानिवृति देने की प्रक्रिया में जुटा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जयपुर ग्रामीण में सांभर सीआई पूरणमल और ग्रामीण पुलिस लाइन में निलम्बित चल रहे नागरमल को इस प्रक्रिया के तहत नोटिस दिया जा चुका है। पूरणमल यादव झुंझुनूं के बुहाना, सिंघाना और मलसीसर थाने में रह चुके हैं। इन्हें तीन महीने का अग्रिम वेतन भी दिया गया है। वहीं पुलिस मुख्यालय में कार्यरत एक निरीक्षक और झुंझुनूं के एक निरीक्षक को भी नोटिस थमाया गया है।
तीन अन्य पुलिस निरीक्षकों को नोटिस पहुंचाने की कार्यवाही चल रही है। पुलिस अधिकारियों की माने तो इन पुलिस निरीक्षकों का कार्य संतोषजनक नहीं रहा है। कुछ की भ्रष्टाचार की शिकायतें थीं। डीआईजी कार्मिक ने बताया कि कार्य संतोषजनक नहीं होने पर हाईलेवल कमेटी ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृति देने की सिफारिश की है। मामला अभी प्रक्रियाधीन है।
झुंझुनूं के बुहाना थाना प्रभारी देवेन्द्र प्रताप सिंह की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई है। उनके खिलाफ अनके शिकायतें मिली थी। पीएचक्यू से आदेश आने के बाद बुधवार शाम चार बजे उन्हें थाने से रवाना कर दिया गया। देवेन्द्र मार्च 2019 से बुहाना में तैनात था। बता दें कि पुलिस महानिदेशक भूपेन्द्र सिंह ने पहले ही चेताया था कि विभाग में लापरवाही,गड़बड़ी और भ्रष्टाचार करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। इस बीच इसको लेकर पुलिस मुख्यालय में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। चर्चा है कि अनिवार्य सेवानिवृति दी जाने वाले एक पुलिस निरीक्षक की हाल ही में डीपीसी में पदोन्नति होने वाली थी। वहीं इस प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अधिकारियों में चर्चा है कि कई ऐसे अफसर हैं जिन पर अपराधियों से मिलीभगत और भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। उनकी शिकायतें भी हुई है। इसके बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है।

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