Thursday, June 11, 2020


 *नेत्रदान मरने के बाद भी इस खूबसूरत दुनिया को देखती रहेगी हमारी आंखें- कंचन शर्मा
*विश्व नेत्रदान दिवस पर नेत्रदान के लिए शपथ दिलवाई*

प्रत्येक वर्ष विश्व के विभिन्न देशों में नेत्रदान की महत्ता को समझते हुए 10 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय दृष्टिदान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इसके जरिए लोगों में नेत्रदान करने की जागरूकता  फैलाई जाती है। विश्व दृष्टिदान दिवस का उद्देशय लोगों में अंधविश्वास को दूर करना है आँखों और दृष्टि का हमारें जीवन में बहुत बड़ा महत्व है।  आँखों का हमारे जीवन में जो महत्व है वह हम भलीभांति जानते हैं। संसार की प्रत्येक वस्तु का परिचय हमारी आँखें ही तो हमें देती हैं और इस रंगबिरंगी दुनिया का आनंद भी हम अपनी आँखों द्वारा ही उठा पाते हैं। बिना आँखों के रंगों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। आंकड़ों के अनुसार भारतवर्ष में प्रति हजार शिशुओं मे 9 शिशु नेत्रहीन जन्म लेते है और देश में प्रति वर्ष 30 लाख लोगों की मौत होती है। यदि इन 30 लाख लोगों में से सिर्फ एक प्रतिशत याने सिर्फ 30 हजार लोगों ने भी नेत्रदान करे तो तो अपने आप ही हमारे देश से अन्धता खत्म हो जायेगी। लोग अंधविश्वास के कारण Eye Donation नहीं करते।अन्धविश्वास यह है कि उनका मानना हैं कि अगले जन्म में वे नेत्रहीन ना पैदा हो जाएं। इस अंधविश्वास की वजह से दुनियां के कई नेत्रहीन लोगों को जिंदगी भर अंधेरे में ही रहना पड़ता है। सभी लोगों को इस बात को समझना होगा और नेत्रदान अवश्य करना चाहिए। हमारे चारों वेद, सभी शास्त्र, बाइबल, कुरान यही कहते है कि नेत्रदान महादान है। इसलिए देर मत कीजिएगा। आज ही नेत्रदान का संकल्प लीजिए। कंचन शर्मा का कहना है कि नेत्रदान का सिर्फ संकल्प लेने से काम नही बनेगा। क्योंकि आंकड़े बताते है कि जितने लोग नेत्रदान का संकल्प लेते है उनमेंसे वास्तव में बहुत ही कम लोगों की आंखे काम आ पाती है। क्योंकि उन्होंने इसकी जानकारी अपने परिवार को नहीं दी थी।विश्व नेत्रदान दिवस का मकसद नेत्रदान के बारे में व्यापक पैमाने पर जन जागरूकता पैदा करना है तथा लोगों को मृत्यु के बाद अपनी आँखें दान करने की शपथ लेने के लिए प्रेरित करना है। विकासशील देशों में प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक दृष्टिहीनता है।
एक आंकड़े के अनुसार भारत में लगभग 1.25 करोड़ लोग दृष्टिहीन हैं, जिसमें करीब 30 लाख व्यक्ति नेत्र प्रत्यारोपण के माध्यम से नवदृष्टि प्राप्त कर सकते हैं। जितने लोग हमारे देश में एक साल में मरते हैं, अगर वे मरने के बाद अपनी आँखें दान कर जाएँ तो देश के सभी नेत्रहीन लोगों को एक ही साल में आँखें मिल जाएंगी। कंचन शर्मा बताती हैं कि ऐसा नहीं है कि लोग नेत्रदान के महत्व व आवश्यकता को नहीं समझते हैं, हम में से बहुत से लोग मरणोपरांत नेत्रदान करना चाहते हैं, किन्तु कैसे करें, कहाँ करें, ये जानकारी न होने के अभाव में वे चाहकर भी अपनी आँखें जरूरतमंदों को देने का पुण्य लाभ नहीं कमा पाते हैं। मृत्यु के पश्चात् जल्द से जल्द लगभग 4 से 6 घंटे के अन्दर नेत्रदान करवा देना चाहिए । अगर आप किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय वहाँ या आस पास मौजूद है तो परिवार के लोगों को नेत्रदान के लिए प्रोत्साहित कीजिए । विश्व नेत्रदान दिवस प्रतिवर्ष 10 जून को मनाया जाता है| यह दिवस नेत्रदान के महत्व के बारे में व्यापक पैमाने पर जागरूकता फ़ैलाने तथा लोगों की मृत्यु के बाद अपनी आँखे दान करने की शपथ दिलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है|हर व्यक्ति यह चाहता है कि ऐसा कुछ करे कि मृत्यु के बाद भी समाज उसे याद करे या फिर वह अमर हो जाये,लेकिन अमर होने के लिए कुछ असाधारण काम करने होते है। बतादे की कंचन शर्मा विगत कई वर्षों से अंगदान,देहदान की मुहिम से जुड़ी हुई है। फरवरी में अपनी माताजी के देहांत के बाद उनका नेत्रदान करवाया। उनका कहना है  कि मृत्यु के पश्चात परिवार के लोग मृतक के शरीर को या तो अग्निदान या जमीनदान कर देते है परन्तु अग्निदान या जमीनदान से पहले अगर हम उस मृतक की आँखें उसकी इच्छा अनुसार किसी जीवित नेत्रहीन को दान करके उसके जीवन अंधकार दूर कर दे तो वह मृतक व्यक्ति की अपनी दान की हुई आँखो से इस दुनिया को देख सकता है। हम कह सकते कि वह व्यक्ति हमेशा के लिए हमारे बीच इस दुनिया मे जीवित रहेगा। हम सभी को नेत्रदान का शपथ पत्र अवश्य भरना चाहिए साथ ही अपने परिवार को उससे अवगत भी कराना जरूरी है ।
"नेत्रदान महादान" की इस मुहिम में आप सब जुड़िए और दूसरों को भी प्रेरित करिए

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